28.9.22

M-039 कभी लफ्ज़ नहीं

कभी लफ्ज़ नहीं मिलते, 
कभी ज़ुबाँ नहीं खुलती।
ख़ामोश सी मुहब्बत की,
ऐसी मिसाल नहीं मिलती।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" M-039

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