27.7.22

T-023 हर परेशां

हर परेशां ज़िन्दगी अपनी सी  लगती है,
सुन लेता हूँ दास्ताने-दर्द जिस किसी की,
वो ज़िंदगी भी मुझे अपनी सी लगती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-023

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