8.7.22

S-159 हमे मालूम है

हमें मालूम है आप न आएंगे कभी, मगर
हमें भी ज़रा अपनी हदे-इंतज़ार देखनी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-159

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...