17.2.22

S-096 मेरे प्यार को

मेरे प्यार को तो हारना ही था,
इकतरफ़ा जो ठहरा वो बेचारा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-096

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...