7.2.22

S-093 आंखें तेरी मुन्तज़िर

आंखें तेरी मुन्तज़िर रहेंगी, सांस जाते-जाते,
तू कितनी भी देर कर दे मेहरबाँ आते-आते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-093

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