23.2.22

Q-047 बस आपके ही बदलने

बस आपके ही बदलने की देर थी,
रफ्ता-रफ्ता ये ज़माना भी बदल जाएगा।
अब आप पर मुनस्सर है हर शय,
मौसम भी जो चाहेंगे, वैसा ही बदल जाएगा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-047


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