प्यार-मुहब्बत की ज़मी पर नफ़रतों के बीज बो देते हैं,
बेहद हसीन वक्त ज़िन्दगी का हम खुद ही खो देते हैं,
नहीं छोड़ते ज़िद, नहीं मानते वक़्त के तक़ाज़े को,
गुज़र जाता है जब वक्त, दोष अपने नसीब को देते हैं।
बेहद हसीन वक्त ज़िन्दगी का हम खुद ही खो देते हैं,
नहीं छोड़ते ज़िद, नहीं मानते वक़्त के तक़ाज़े को,
गुज़र जाता है जब वक्त, दोष अपने नसीब को देते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-042
No comments:
Post a Comment