28.1.22

P-055 रिश्तों को भी

रिश्तों को भी वादों की तरह तोड़ने लगे,
रिश्तों में भी लोग जोड़-तोड़  करने लगे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-055

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