13.11.21

S-042 भरभरा कर

भरभरा कर गिर गए ताल्लुक़ात झटके में,
बड़ा वक्त लगा था जिनको तामीर करने में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-042

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...