10.11.21

Q-025 रौशन चराग़ों

रौशन चराग़ों को यूं न बुझा,
सहर तक वही जले जाते हैं। 
जुगनुओं से उजाले नहीं होते,
वो तो आते और चले जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-025

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