हमने तो सुना था जो कर देती है बर्बाद, उसे 'नफरत' कहते हैं,
पर ये ज़माने वाले भी हैं अजब, ये उसको 'मुहब्बत' कहते हैं।
पर ये ज़माने वाले भी हैं अजब, ये उसको 'मुहब्बत' कहते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-019
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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