11.7.21

Q-015 यौमे-पैदाइश

यौमे-पैदाइश आ रहे हैं, जा रहे हैं,
और सिमटती जारहीं हैं जिंदगियां,
साल दर साल बढ़ रहे हैं रंजो-ग़म,
और बढ़ती ही जा रहीं है दूरियां।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-015

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