7.7.21

P-011 हराकर कुर्सी

हराकर कुर्सी-नशींनों को, हम कुर्सी पर बैठे हैं।
बचाकर देश को, हम जनादेश से कुर्सी पर बैठे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-011




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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...