3.7.21

S-025 आपकी निगाहों में

आपकी निगाहों में अगर हम थे गुस्ताख़, हम ही गुनाहगार थे,
तो ये भी सच है, सिर्फ़ हम ही थे मुश्ताक़,
हम ही ग़मगुसार थे।

 -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-025

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