27.6.21

S-024 ग़मज़दा को भला

ग़मज़दा को भला और भी ग़मज़दा  हम क्यों करें,

वक़्त भर देगा ज़ख्म, उसे और हरा हम क्यों करें।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-024

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K-007 सूरज को मैं

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