20.5.21

S- 005 नसीहत एक बड़ी

नसीहत एक बड़ी छोड़कर गया है वो आज दूसरों के लिए,
ख़ुद ही दफ़्न है वो यहां खोदे थे गड्ढे जिसने दूसरों के लिए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-005

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K-007 सूरज को मैं

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