29.4.21

S- 001 बहुत लोग हैं

बहुत लोग हैं, कहीं कोई कमी नहीं,

मजबूर को मजबूर करना ज़रूरी नहीं। 


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" 1-001


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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...